प्रस्तावना
Guru Randhawa का ज़िक्र होते ही उनके वो गाने ज़हन में गूंजने लगते हैं, जो हर किसी के दिल को छू गए हैं। उनकी धुनें न सिर्फ़ भारत में, बल्कि दुनिया भर में धूम मचा चुके हैं, ग्लोबल म्यूज़िक चार्ट्स तक अपनी जगह बना चुके हैं। चाहे शादी का जश्न हो, कॉलेज का फेस्ट हो, या फिर क्लब की मस्ती भरी रात, गुरु की आवाज़ हर जगह माहौल को और रंगीन कर देती है।

मगर जब यही गायक अपने ताज़ा गाने में कुछ ऐसा लेकर आता है, जो समाज में गलत संदेश फैलाता है, तो दिल में खटका सा लगता है। एक कलाकार की असली शिनाख्त सिर्फ़ उसकी धुनों या आवाज़ से नहीं, बल्कि उसकी सोच और ज़िम्मेदारी से भी बनती है, ना? ‘Azul’ गाने ने कुछ ऐसा ही विवाद खड़ा किया, जिसने गुरु रंधावा को कड़ी आलोचना का सामना करने पर मजबूर कर दिया।
गाने Azul की कहानी और विज़ुअल
Azul का वीडियो एक स्कूल बास्केटबॉल कोर्ट से शुरू होता है। कैमरा एक लड़की पर फोकस करता है, जो यूनिफॉर्म में है और हाथ में लॉलिपॉप लिए खड़ी है। कैमरा धीरे-धीरे उसकी टांगों से ऊपर जाता है और यह सब कुछ suggestive अंदाज़ में दिखाया गया है।
आगे चलकर गाने में लड़की की तुलना प्रीमियम शराब ब्रांड्स जैसे Azule, Don Julio और Henessy से की जाती है। यानि लड़की को luxury liquor brands की तरह desire का प्रतीक बना दिया गया है।
यही वह बिंदु है जिसने दर्शकों और आलोचकों दोनों को असहज कर दिया है।
क्यों है यह imagery समस्या?
1. Power Dynamics का सवाल
इस गाने में Guru Randhawa खुद फोटोग्राफर बने हैं—स्पष्ट रूप से एक वयस्क पुरुष। दूसरी ओर लड़की एक स्कूल यूनिफॉर्म में है। यह power imbalance सीधे-सीधे खतरनाक संदेश देता है कि एक एडल्ट का फैंटेसी किसी नाबालिग जैसी दिखने वाली लड़की पर acceptable है।
2. Child Abuse का संदर्भ
भारत में बच्चों पर यौन शोषण की घटनाएँ बहुत आम हैं। 2007 की महिला और बाल विकास मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया था कि लगभग 50% बच्चों ने sexual abuse का अनुभव किया है। ऐसे में इस तरह की इमेजरी का इस्तेमाल पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
3. Liquor Branding से तुलना
गाने में लड़की की तुलना शराब ब्रांड्स से की गई है। यानी लड़की को sexual object के साथ-साथ एक consumable product की तरह प्रस्तुत किया गया। यह objectification की बेहद नकारात्मक मिसाल है।
क्या यह सिर्फ़ Fantasy है?
कई लोग कहेंगे कि वीडियो में जो लड़की है, वह असल में एडल्ट मॉडल है। लेकिन यहाँ बात representation और context की है।
- मॉडल भले ही एडल्ट हो, लेकिन जब उसे school uniform पहनाकर sexualise किया जाता है, तो यह गलत संकेत देता है।
- बड़ी reach रखने वाले कलाकारों से उम्मीद होती है कि वे ऐसा कंटेंट न बनाएँ जो child sexualisation को normalise करे।
पॉप कल्चर में Schoolgirl Fetish का इतिहास
यह पहली बार नहीं है कि पॉप कल्चर में schoolgirl imagery का इस्तेमाल हुआ है।
- 1998 में Britney Spears का गाना “Baby One More Time” इसी तरह की schoolgirl theme पर था। फर्क यह था कि उस समय Britney खुद teenager थीं और गाना एक स्कूल रोमांस को दिखाता था।
- वहीं, Azul में वयस्क पुरुष की नज़र से schoolgirl imagery sexualise की गई है—जो कहीं ज़्यादा समस्याग्रस्त है।
समाज पर असर
1. Gender-based Violence से जुड़ाव
भारत जैसे देश में जहां रोज़ minor girls के खिलाफ़ हिंसा और शोषण की खबरें आती हैं, वहाँ इस तरह का कंटेंट बेहद गैर-संवेदनशील है।
2. Predatory Attitude का Normalisation
जब बड़े आर्टिस्ट्स schoolgirl fetish को ग्लैमरस तरीके से पेश करते हैं, तो यह समाज में एक predatory mindset को बढ़ावा देता है। यानी दर्शकों को यह संदेश जाता है कि इस तरह की फैंटेसी acceptable है—जो कि खतरनाक सोच है।
Guru Randhawa पर पहले भी उठे सवाल
अगर गौर करें, तो ‘Azul’ ने एक बार फिर वही कहानी दोहराई है—उन विवादों की फेहरिस्त में एक और कड़ी जोड़ दी, जिसमें Guru Randhawa के गाने पहले से ही शामिल रहे हैं।
- उनका गाना “Sirra” आपत्तिजनक बोलों की वजह से विवादों में आया।
- इसमें एक लाइन को लेकर धार्मिक भावनाएँ आहत होने का आरोप लगा।
- मामला शिकायत और सुनवाई तक पहुँचा।
इससे साफ है कि Guru Randhawa और उनकी टीम विवादास्पद कंटेंट से publicity पाने का रास्ता अपनाते रहे हैं।
सोशल मीडिया और पब्लिक रिएक्शन
Azul रिलीज़ होने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं।
- ट्विटर पर कई यूज़र्स ने लिखा कि यह वीडियो minor fetishisation को बढ़ावा देता है।
- कुछ ने कहा कि एक पॉपुलर आर्टिस्ट का इस तरह schoolgirl imagery का इस्तेमाल करना irresponsible है।
- वहीं, कुछ फैंस ने इसे सिर्फ़ एक “फैंटेसी” कहकर defend किया।
लेकिन बड़े पैमाने पर लोगों ने यही माना कि यह गाना गलत मैसेज देता है और इसे तुरंत हटाया जाना चाहिए।
अन्य कलाकारों से तुलना
यह मसला सिर्फ़ गुरु रंधावा या उनके किसी एक गाने तक सीमित नहीं है; उनका गाना तो बस एक छोटा-सा उदाहरण है। पूरी संगीत इंडस्ट्री में ऐसी प्रवृत्तियाँ आम हैं, जहाँ गीतों या उनकी प्रस्तुति के ज़रिए ऐसी चीज़ें सामने आती हैं, जो समाज में गलत संदेश फैलाने का कारण बनती हैं।
लंबे समय से Honey Singh के गानों पर महिलाओं की objectification को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
Badshah के कई गानों पर भी यही आरोप लग चुके हैं कि उनमें hypermasculinity और objectification को promote किया गया है।
Azul बाकी गानों से इसलिए अलग दिखता है क्योंकि इसमें स्कूल यूनिफॉर्म और नाबालिग जैसी छवि को आकर्षक अंदाज़ में परोसा गया है, जो इसे और भी विवादास्पद बना देता है।
कानूनी और सेंसरशिप का पहलू
भारत में गानों और म्यूजिक वीडियोज़ पर सेंसरशिप का ढांचा फिल्मों जितना सख्त नहीं है। लेकिन ऐसे मामलों में शिकायत दर्ज होने पर कोर्ट या पुलिस हस्तक्षेप कर सकती है।
Azul जैसे गाने यह सवाल खड़े करते हैं कि क्या अब समय आ गया है कि म्यूजिक वीडियोज़ के लिए भी सख्त सेंसरशिप लागू की जाए।
Guru Randhawa का पॉप कल्चर पर असर
Guru Randhawa की reach सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। उनके गाने दुनिया भर में सुने जाते हैं। ऐसे में उनका बनाया हर कंटेंट सीधे तौर पर युवाओं को प्रभावित करता है।
“लाहौर” जैसे गानों ने cross-border cultural unity की झलक दी थी।
वहीं Azul जैसे गाने cultural regression और गलत मैसेज का प्रतीक बन जाते हैं।
इससे साफ है कि कलाकार की लोकप्रियता जितनी बड़ी होती है, उसकी जिम्मेदारी उतनी ही बढ़ जाती है।
आगे का रास्ता
Artists की जिम्मेदारी – Guru Randhawa जैसे बड़े नामों को समझना होगा कि उनका कंटेंट सिर्फ़ entertainment नहीं बल्कि समाज के values को भी प्रभावित करता है।
Producers की जिम्मेदारी – गानों और वीडियोज़ को approve करने वालों को संवेदनशील विषयों पर सतर्क रहना होगा।
Audience की भूमिका – दर्शकों को भी अपनी आवाज़ उठानी होगी और ऐसे कंटेंट को blind support देने से बचना होगा।
निष्कर्ष
Guru Randhawa एक लोकप्रिय गायक हैं जिनके गानों का असर करोड़ों लोगों पर पड़ता है। लेकिन Azul में इस्तेमाल की गई schoolgirl fetishisation imagery न सिर्फ़ गैर-जिम्मेदाराना है बल्कि खतरनाक भी है।
यह गाना सिर्फ़ एक म्यूजिक वीडियो नहीं है, बल्कि यह एक cultural statement है—और यह statement समाज को गलत दिशा में ले जाता है।
जब तक आर्टिस्ट्स और प्रोड्यूसर्स अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक पॉप कल्चर में objectification, hypermasculinity और regressive पैटर्न बने रहेंगे। ज़रूरी है कि संगीत सिर्फ़ मनोरंजन न होकर एक जिम्मेदारी भी निभाए।
FAQs
FAQs – Guru Randhawa और Azul गाने को लेकर सवाल
Q1. Guru Randhawa का नया गाना Azul विवादों में क्यों है?
Azul में schoolgirl imagery का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें एक वयस्क पुरुष की नजर से एक स्कूली लड़की को sexualise किया गया है। यह समाज को गलत संदेश देता है और इसी वजह से विवादों में है।
Q2. क्या वीडियो में दिखने वाली मॉडल नाबालिग है?
नहीं, मॉडल असल जिंदगी में एडल्ट है। लेकिन वह स्कूल यूनिफॉर्म में दिखाई गई है और कैमरे की sexualised gaze इस imagery को problematic बना देती है।
Q3. गाने के बोल में क्या समस्या है?
गाने में लड़की की तुलना प्रीमियम शराब ब्रांड्स (Azule, Don Julio, Henessy) से की गई है। यानी लड़की को एक consumable luxury product की तरह पेश किया गया है, जो objectification का उदाहरण है।
Q4. क्या Guru Randhawa पहले भी विवादों में रहे हैं?
हाँ, इससे पहले उनका गाना “Sirra” भी आपत्तिजनक बोलों की वजह से विवादों में आया था। धार्मिक भावनाएँ आहत करने की शिकायत दर्ज हुई थी।
Q5. क्या इस तरह के गानों पर सेंसरशिप होती है?
म्यूज़िक वीडियोज़ पर फिल्मों जैसी सख्त सेंसरशिप का पहरा नहीं होता, मगर अगर कोई शिकायत आती है, तो पुलिस या अदालत को दखल देना पड़ सकता है।
Q6. समाज पर ऐसे गानों का क्या असर पड़ता है?
इस तरह के गाने predatory mindset को normalise करते हैं और minors के sexualisation को बढ़ावा देते हैं। भारत जैसे देश में, जहां child abuse पहले से एक गंभीर समस्या है, यह imagery और भी खतरनाक है।
Q7. ऐसे विवादों का समाधान क्या है?
कलाकारों और निर्माताओं को अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारी का एहसास होना चाहिए।
फैन्स को भी बिना सोचे-समझे समर्थन करने की बजाय सही-गलत पर सवाल उठाने चाहिए।
Regulating bodies को म्यूजिक वीडियोज़ पर भी सख्त guidelines बनानी चाहिए।