Rahul Gandhi ने 1,00,250 वोट चोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह है उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस जिसमें उन्होंने सीधे-सीधे भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग (ECI) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि कुल 1,00,250 वोटों की चोरी की गई और यह काम 5 अलग-अलग तरीकों से किया गया।

राहुल गांधी का आरोप है कि यह कथित गड़बड़ियां महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में सामने आई हैं। खास बात यह रही कि उन्होंने एक विशेष मतदाता — आदित्य श्रीवास्तव — का उदाहरण देकर यह साबित करने की कोशिश की कि एक ही व्यक्ति का नाम तीन राज्यों में मतदाता सूची में दर्ज है।
Rahul Gandhi के आरोप: 5 तरीकों से हुई “वोट चोरी”
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि किस तरह से मतदाता सूची में गड़बड़ी कर वोटों की हेराफेरी की गई। उन्होंने जिन 5 तरीकों की बात की, वे इस प्रकार हैं:
- फर्जी मतदाता – कई ऐसे नाम जो असल में मौजूद नहीं हैं या वर्षों पहले मृत हो चुके हैं।
- डुप्लिकेट वोटर – एक ही व्यक्ति का नाम अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में दर्ज होना।
- गलत पता – वोटर के पते पर जब सत्यापन किया गया तो पाया गया कि वहां कोई उस नाम का व्यक्ति नहीं रहता।
- निजी एजेंसियों की मदद से हेराफेरी – राहुल का कहना है कि कुछ निजी कंपनियों को डेटा जुटाने का काम सौंपा गया, जिन्होंने नियमों का उल्लंघन किया।
- सीसीटीवी फुटेज का गायब होना – कई मतदान केंद्रों पर निगरानी कैमरों की फुटेज गायब पाई गई।
इन तरीकों का ज़िक्र करते हुए राहुल गांधी ने यह दावा किया कि इन सबका मकसद था मतदाता सूची में गड़बड़ी करना ताकि चुनावी नतीजों को प्रभावित किया जा सके।
आदित्य श्रीवास्तव मामला: एक नाम, तीन राज्य
राहुल गांधी ने जिस “आदित्य श्रीवास्तव” का जिक्र किया, वो अब इस पूरे विवाद का मुख्य चेहरा बन गया है। राहुल ने आरोप लगाया कि आदित्य श्रीवास्तव नाम का व्यक्ति कर्नाटक, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र – तीनों राज्यों की मतदाता सूची में मौजूद है। यह अपने आप में एक गंभीर सवाल खड़ा करता है कि क्या मतदाता सूची सही तरीके से तैयार की गई है?
चुनाव आयोग का जवाब: देर से क्यों जागे?
Rahul Gandhi के आरोपों का चुनाव आयोग ने तत्काल जवाब दिया। आयोग ने कहा कि कर्नाटक की मतदाता सूची का प्रारूप नवंबर 2024 में सभी राजनीतिक दलों को उपलब्ध करा दिया गया था। अंतिम सूची जनवरी 2025 में जारी की गई, लेकिन तब तक कांग्रेस या राहुल गांधी की ओर से कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई।
इसके अलावा, चुनाव आयोग ने राहुल गांधी से यह पूछा कि जब पूरी प्रक्रिया पारदर्शी थी और समय पर उन्हें सूची उपलब्ध कराई गई थी, तो फिर अब — कई महीने बाद — उन्होंने अचानक ये आरोप क्यों लगाए?
शपथ पत्र की मांग
चुनाव आयोग ने Rahul Gandhi से यह मांग की है कि वे यदि गड़बड़ी के आरोप में गंभीर हैं तो उन्हें एक शपथ पत्र में लिखकर सभी बिंदुओं को दर्ज कराना चाहिए। आयोग का कहना है कि केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाने से कुछ नहीं होगा — उन्हें औपचारिक प्रक्रिया अपनानी चाहिए।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी शपथ पत्र में गलत जानकारी देने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 227 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
कांग्रेस का रुख: शपथ पत्र नहीं देंगे
कांग्रेस पार्टी ने साफ कर दिया है कि उनकी ओर से कोई शपथ पत्र नहीं दिया जाएगा। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग को पहले ही शिकायत की जा चुकी थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब जब मामला सार्वजनिक हुआ है, तब आयोग इस तरह का औपचारिक जवाब दे रहा है।
बिहार में SIR प्रक्रिया और राहुल का समर्थन
बिहार में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 65 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इनमें से कई लोग या तो मृत पाए गए या उस पते पर नहीं रहते जहां उनका नाम दर्ज था। Rahul Gandhi ने बिहार की इस प्रक्रिया को अप्रत्यक्ष रूप से सही ठहराते हुए कहा कि कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में भी इसी तरह की पुनरीक्षा की जरूरत है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और असर
बीजेपी ने Rahul Gandhi के इन आरोपों को “गैर-जिम्मेदाराना” और “जनता का अपमान” करार दिया है। पार्टी का कहना है कि राहुल गांधी को जब भी चुनावी नतीजे उनके पक्ष में नहीं आते, वे चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं।
वहीं विपक्षी दलों में से कुछ ने राहुल गांधी के आरोपों को गंभीरता से लिया है और जांच की मांग की है।
क्या होगा आगे?
अब सवाल उठता है कि क्या चुनाव आयोग इन आरोपों की जांच करेगा? और अगर करेगा तो क्या वह निष्पक्ष होगी? क्या कांग्रेस पार्टी दस्तावेजी साक्ष्य देगी? और सबसे बड़ा सवाल — क्या यह मामला मतदाता के अधिकारों और भारतीय लोकतंत्र की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल बनकर उभरेगा?
Rahul Gandhi ने अपनी तरफ से यह साफ कर दिया है कि वे इस मुद्दे को केवल एक राजनैतिक विवाद के रूप में नहीं, बल्कि “जनमत और लोकतंत्र की रक्षा” के रूप में देख रहे हैं।
निष्कर्ष
“1,00,250 वोट चोरी” का यह मुद्दा अब सिर्फ एक आरोप नहीं रहा — यह भारतीय लोकतंत्र और चुनाव प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा कर रहा है। जहां एक ओर चुनाव आयोग का कहना है कि सारी प्रक्रिया समय पर और नियमों के तहत की गई, वहीं राहुल गांधी और कांग्रेस का आरोप है कि प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी हुई है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस मुद्दे को लेकर कोई कानूनी या राजनीतिक कार्रवाई होती है या यह मामला सिर्फ बहस और बयानों तक ही सीमित रह जाता है।